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हिंदुस्तान की दिल कश्मीर

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                                                                                   हिंदुस्तान की दिल  कश्मीर 

न्याय पालिका संग राजनीती

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                                                                         न्याय पालिका  संग  राजनीती   आज हमारे समाज  में न्याय पालिका की शाख  आये दिन गिरती जा रही है जीसका  मुख्य कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों का  सत्ता में रहते हुवे राजनितिक लाभ हेतु  न्याय पालिका  का उपयोग करना है  जो अत्यंत चिंता जनक है तथा न्यायालय की गरिमा को विश्वास को दीन पर दिन कम करने जैसा कृत्य किया जा रहा है  वर्तमान में जिस तरह के धटना क्रम सामने आये है  वे यह सिद्ध कर देने के लिए काफी है की न्याय पालिका को हमारे नुमाइंदे अपने हिसाब से चलना  चाहते है यदि ऐसा  नहीं है तो   सर्वोच्च न्यालय के न्यायधीश के ऊपर चारित्रिक दोष जैसा आरोप नहीं लगता राम मंदिर का मामला  अभी तक लंबित नहीं होता  आर्थिक अपराधी विश्व ...

उनदिनों की यादे

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                                        उन दिनों की यादे  बिन तेरे जिन्दगी अधूरी लगती है  न दिन कटते है न नीद पूरी होती है  रातों को सताना जो बंद किया तुमने  सांसो की गिनती अब उलटी लगती है                                                न जाने किस हल में होगी तू                                न जाने किश ख्याल में होगी तू                                गर एक खबर तेरी हमे   मिल जाये                               तो  जीने का एक आस हमे मिल जाय   तेरी यद् तो आती है हमे  जलन ...

वर्तमान राजनीति

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                                       नेतागिरी वनाम राजनीति    समाज के निति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कारको में सामिल राजनीति आज किस मुहाने पर आके खड़ा हो गया है जो बहुत ही चिंतनीय है आज का नेता जो खुद को राजनीती का ब्रांड अम्बेसडर समझता है खुद अपने विकाश के बारे में सोचने में लगा है जनता के विकास की क्या खाक चिंता है गांवके निर्वाचित सदस्य से लगायत संसद के सदस्य तक ये जानते है की जब चुनाव आएगा जनता को अपने पच्छ में करने केलिए कौन सी चल चलनी है तब तक क्यों न अपना विकास कर  लिया जाय पुरे कार्यकाल में जनता को प्रताड़ित करना तो मनो परम्परा सी बन गयी है बर्तमान राजनीती में बहुत ही तेजी से प्रयोग में लायाजाने वाला विधा विद्यमान हो गया है जो है जुमला इसका तात्पर्य ऐसा वादा जो कभी निभाया न जाय  जिसे भारत का चुनाव आयोग कभी ना किये जाने का हिदायत देती थी जो आचर संघिता  का उलंघन मना जाता था आज पुरे जोर सोर से सभी राजनैतिक दल इसका उपयोग करने लगे है राजन...

संघर्ष की दुनिया कितनी कठिन है

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                                 संधर्ष की दुनिया कितनी कठिन है   जब कोई आवाज दे तो समझ लेना कुछ तो है. जब कोई कम बनता ना दिखे तो समझ लेना कुछ तो है| चलते चलते कभी कांटे चुभे पाँव में तो ! समझ लेना संधर्ष बहुत है ठाव में   ठहरना मंजिल से दूर कर देगा ! गिरना उठाना चलना संघर्ष करना | रही यदि आदत में सामिल  तो!  होगी घबराहट मंजिल को खुद ब खुद पास आने को| संघर्ष की दुनिया कितनी कठिन है ! जानकर ही दम लेना ठान ली हमने| देखना है कब तक रहता है दूर मंजिल हमसे ! गिरना उठाना सम्हलना फिर चलना सिख ली हमने | जब कोई आवाज दे तो समझ लेना कुछ तो है !!
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                  जय माता दी भारत के समस्त  नागरिकों  को विक्रमी संबत २०७५ व नवरात्र  की शुभकामना  व बधाई आपका शुभाकाक्षी दीपक कुमार मिश्र  अधिवक्ता वाराणसी 
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वाराणसी कचहरी के कलेक्टरेट का कब होगा विकाश? लोकतंत्र के इस पहिए  का उपेक्षा  कब तक सहेगाअधिवक्ता समाज? कौन  है जिम्दार बदहाली का

सम्मान समारोह

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      अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति द्वारा सम्मानित किया गया  वाराणसी स्थित अंजलि वाटिका मेआयोजीत पत्रकार सम्मेलन में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय महासचिव तथा वाराणसी के एडीएम सिटी श्री विश्राम यादव की  उपस्थिति में अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर विधि तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया   १

आह्वान गीत

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         साभार:-          आह्वान गीत  (राम अवतार रस्तोगी 'शैल') आज तक तो मैं प्रणय के गीत ही गाता रहा हूं... कौन क्यों कितना मुझे प्रिय बस सुनाता भर रहा हूं... पर न जाने आज क्योंकर मैं नहीं गा पा रहा हूं... गीत बदले साथ स्वर के, स्वयं बदला जा रहा हूं... आज मेरे दीन स्वर का दैन्य मुझको खल रहा है... वीरता के गान में अब मैं उसे बदला रहा हूं... आज मेरी हर दिशा से स्वर यही उठ पा रहा है... तोड़ वीणा लो उठा कवि, भैरवी मैं गा रहा हूं... पर न जाने आज क्योंकर मैं नहीं गा पा रहा हूं... गीत बदले साथ स्वर के, स्वयं बदला जा रहा हूं... आज मेरे देश का हर नागरिक यह कह रहा है... मैं धरा पर स्वर्ग लख कर, मौन ही रहता रहा हूं... पर शान्ति का आह्वान मुझको व्यर्थ अब लगने लगा है... युद्ध का उपहार अभिनव, जग को दिलाने आ रहा हूं... पर न जाने आज क्योंकर मैं नहीं गा पा रहा हूं... गीत बदले साथ स्वर के, स्वयं बदला जा रहा हूं... जा रहा छूने गगन को वह हिमालय कह रहा है... बर्फ से दबता हुआ भी, आग में जलता रहा हूं... पिट गया हूं दोस्ती में, अब मगर ऐसा नह...
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                हर हर महादेव बाबा मार्कण्डेय महादेव  कैथी में                    बाबा का आरती पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुवा                               

ADVOCATE DEEPAK KUMAR MISHRA

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  मित्रअधिवक्ता बंधुवो के साथ आज काआनंद