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संघर्ष की दुनिया कितनी कठिन है
संधर्ष की दुनिया कितनी कठिन है जब कोई आवाज दे तो समझ लेना कुछ तो है. जब कोई कम बनता ना दिखे तो समझ लेना कुछ तो है| चलते चलते कभी कांटे चुभे पाँव में तो ! समझ लेना संधर्ष बहुत है ठाव में ठहरना मंजिल से दूर कर देगा ! गिरना उठाना चलना संघर्ष करना | रही यदि आदत में सामिल तो! होगी घबराहट मंजिल को खुद ब खुद पास आने को| संघर्ष की दुनिया कितनी कठिन है ! जानकर ही दम लेना ठान ली हमने| देखना है कब तक रहता है दूर मंजिल हमसे ! गिरना उठाना सम्हलना फिर चलना सिख ली हमने | जब कोई आवाज दे तो समझ लेना कुछ तो है !!
न्याय पालिका संग राजनीती
न्याय पालिका संग राजनीती आज हमारे समाज में न्याय पालिका की शाख आये दिन गिरती जा रही है जीसका मुख्य कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों का सत्ता में रहते हुवे राजनितिक लाभ हेतु न्याय पालिका का उपयोग करना है जो अत्यंत चिंता जनक है तथा न्यायालय की गरिमा को विश्वास को दीन पर दिन कम करने जैसा कृत्य किया जा रहा है वर्तमान में जिस तरह के धटना क्रम सामने आये है वे यह सिद्ध कर देने के लिए काफी है की न्याय पालिका को हमारे नुमाइंदे अपने हिसाब से चलना चाहते है यदि ऐसा नहीं है तो सर्वोच्च न्यालय के न्यायधीश के ऊपर चारित्रिक दोष जैसा आरोप नहीं लगता राम मंदिर का मामला अभी तक लंबित नहीं होता आर्थिक अपराधी विश्व ...




